This is the Blog Owner

.

Subscribe Us



Latest Post

नमस्कार दोस्तों, क्या आप कंप्यूटर में रूचि रखते है और कंप्यूटर की जानकारी जानना चाहते है. लेकिन आपको कंप्यूटर के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. तो आपको किसी भी बात की कोई चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है. क्योंकि इस पोस्ट में हम आपको Computer की basic जानकारी दे देंगे की आपको कंप्यूटर क्या है, RAM क्या होता है, Motherboard क्या है, Display/Monitor क्या होता है, keyboard क्या है, माउस क्या है, Drive क्या होता है की पूरी जानकारी हो जाएगी.
computer-ki-jankari-hindi-me
तो दोस्तों अधिक समय न लेते हुए इसके बारे में जानना शुरू करते है. लेकिन इसके पहले मैं आपको computer की परिभाषा बताना चाहता हु क्योंकि ताकि आप Computer के बारे में और अच्छे से समझ सके.

Computer क्या होता है?

Computer एक advance इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो user से input device की मदद से डाटा लेता है और फिर उस पर किसी software की मदद से प्रोसेस करता है और फिर Output device पर user के समझने लायक भाषा में परिणाम देता है और भविष्य के लिए डाटा को Store करता है कंप्यूटर कहलाता है.
computer-input-process-outout-in-hindi

Computer की बेसिक जानकारी in हिन्दी

दोस्तों जब आप कंप्यूटर को देखते होंगे तो आपको कंप्यूटर desk पर 4 चीजे दिखती होगी. 1. CPU Cabinet 2. Monitor 3. Keyboard 4. Mouse सबसे पहले मैं आपको इन 4 बाहरी चीजो के बारे में बताने वाला हु. ताकि आपको कंप्यूटर की जानकारी हो सके.

1. CPU/Cabinet System (सी पी यु)

यह कंप्यूटर का सबसे important पार्ट होता है. क्योंकि इसके अन्दर ही वो सभी पार्ट्स (CPU, Motherboard, RAM, ROM, HDD) होते है जो की कंप्यूटर की कार्य प्रणाली को सम्हालते है. ऊपर बताये सभी internal पार्ट्स होते है जो की cabinet के अन्दर होते है.
cpu-monitor-ke-parts-ki-jankari

2. Monitor/Display/Screen (मॉनिटर)

Monitor यह एक output device होता है, क्योंकि CPU द्वारा प्रोसेस की गयी सभी चीजो का result हमे display करता है. हम जो कुछ भी काम करते है वो सब कुछ हमे display पर दिखाई देता है. जैसे- Painting, Typing, Mouse status और वो सब कुछ जो हम कंप्यूटर पर करते है.

3. Keyboard (कीबोर्ड)

यह एक input device होता है, क्योंकि इसकी मदद से हम कंप्यूटर को instruction (आदेश) देते है. Keyboard user द्वारा दिए गए आदेशो को accept करता है और फिर CPU को प्रोसेस के लिए send करता है. इसमें 104 buttons होते है. जिसमे A to Z, Control keys, Arrow keys, Numbers and characters, Numeric keypad, Function keys आदि शामिल होते है. दोस्तों अगर आप कंप्यूटर की पूरी जानकारी जानना चाहते है और इसमें  विशेष रूचि रखते है तो आपको पुरे keyboard के बारे में भी जरुर जानना चाहिए.
keyboard-mouse-ki-jankari
यह भी पढ़े:-
4. Mouse (माउस)

माउस एक तरह का Pointing & object selecting device होता है. यह एक input device है, इसकी मदद से हम कंप्यूटर पर दिख रही किसी भी चीज को सेलेक्ट कर सकते है. हम माउस को जिस ओर ले जाते है display में दिख रहा cursor भी उसी दिशा में चलता जाता है.

Mouse में तीन button होते है:- Left key, Right key, Scroll bar. माउस को चलने के लिए हमे plan surface की जरुरत पड़ती है.

Computer के Internal parts की जानकारी

जैसा की मैंने आपको अभी ऊपर बताया था की हमारा कंप्यूटर और भी बहुत सारी छोटी-छोटी चीजो से मिलकर बना होता है. जिसमे हर किसी का important रोल होता है. जिन्हें हम कंप्यूटर hardware parts कहते है. Keyboard और mouse भी हार्डवेयर parts की गिनती में ही आते है.

1. CPU

यह कंप्यूटर सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट होता है. क्योंकि कंप्यूटर की सभी गतिविधियाँ यही से संचालित होती है. CPU कंप्यूटर का brain (दिमाग) कहलाता है. यह user द्वारा दिए गए आदेशो का पालन करता है और उन्हें working करता है. इसके आलावा यह गणितीय और logical निर्णय को भी लेता है. इसलिए CPU को कंप्यूटर का nerve कहा जाता है.
cpu-ki-jankari-hindi-me

2. RAM

RAM कंप्यूटर का एसा हिस्सा होता है जहा पर उसके द्वारा वर्तमान में execute किये जा रहे डाटा को संगृहीत किया जाता है. यह किसी भी software को लोड होने में उसे आवश्यक memory प्रदान करता है. RAM डाटा को memory में read और write दोनों का काम करती है. RAM का पूरा नाम Random Access Memory होता है. RAM दो प्रकार की होती है : - SRAM, DRAM.

अगर आप कंप्यूटर की पूरी जानकारी लेना चाहते है तो आपको कंप्यूटर मेमोरी क्या होता है जरुर जानना चाहिए.
ram-rom-hdd-ki-jankari

3. ROM

यह भी मेमोरी का ही एक प्रकार होता है. लेकिन यह RAM से अलग होती है. क्योंकि इस पर किसी भी प्रकार का डाटा write नहीं किया जा सकता है बल्कि सिर्फ डाटा को read किया जा सकता है. यह non-volatile (स्थायी) प्रकार की मेमोरी होती है.

4. Hard Disk Drive

यह एक स्टोरेज device होता है. जिसका उपयोग कंप्यूटर में Windows install करने और user की पर्सनल फाइल्स को स्टोर करने के लिए किया जाता है. HDD विभिन्न Size में मिलती है - 80 GB, 160, 320 GB, 500GB, 1TB......

5. SMPS

SMPS इसका पूरा नाम Switched Mode Power Supply होता है. यह कंप्यूटर में electricity supply को कण्ट्रोल करता है. यह कंप्यूटर में आने वाली धारा AC को DC में परिवर्तित करता है उसके बाद में electricity को computer के सभी parts को supply करता है.
smps-motheboard-ki-jankari
6. Motherboard

यह एक circuit बोर्ड होता है. जहा पर कंप्यूटर के सभी parts connected होते है. RAM, ROM, CPU इससे interconnected होते है. बल्कि HDD, DVD Writer केबल के द्वारा connected होते है. USB Port, VGA Port, Power plug, Parallel port, Serial port, Sound port यह सब motherboard के ही part है.

Software और hardware क्या होता है?

<----Software---->

Software, Instruction का set होता है. जो user के द्वारा दिया जा रहे work को मशीन के समझने लायक बनाता है और फिर उस पर प्रोसेस करके user को फिर से user के समझने लायक result देने में मदद करता है.
Example:- Microsoft Office Word, Excel, Adobe, Antivirus etc.

<----Hardware---->

 Hardware यानि की वो सभी parts जिन्हें हम छु कर देख सकते है और जो कंप्यूटर को कार्यशील बनाने में मदद करते है. मैंने ऊपर आपको hardware parts (keyboard, Mouse, Motherboard etc) के बारे में बताया है. यह सभी hardware parts होते है.

आशा करता हु दोस्तों इस आर्टिकल:- कंप्यूटर की पूरी जानकारी को पढने के बाद आपको कंप्यूटर की basic जानकारी मिल गयी होगी. यह बाते जानने के बाद अब आपको कंप्यूटर कैसे चलाते है like:- On, Off कैसे करते है  और कंप्यूटर कैसे सीखे जरुर जानना चाहिए.

हेल्लो फ्रेंड्स, क्या आप 12 वीं पास कर चुके है और अब किसी Computer कोर्स को करना चाह रहे है. तो DCA computer course आपके लिए सबसे अच्छा साबित हो सकता है. क्योंकि इस कोर्स में आपको कंप्यूटर fundamental से जुडी सारे जानकारी और एप्लीकेशन या प्रोग्राम को चलाना सिखा दिया जाता है. इसलिए आज हम आपको DCA क्या है और DCA का Full Form से जुडी पूरी जानकारी देने वाले है.
dca-ka-full-form-aur-dca-kya-hai

 DCA का Full Form और इसकी  पूरी जानकारी

अगर आप पहली बार DCA का नाम सुन रहे है तो मैं आपको बता दूँ की 12 वीं के बाद यह स्टूडेंट का बहुत लोकप्रिय कंप्यूटर कोर्स है. और DCA का Full Form:- Diploma in Computer Application होता है. इस कोर्स को कर लेने के बाद आप किसी भी private या goverment जॉब work को करने लायक बन जाते है. यानि की इस कोर्स में उन सभी चीजो का समावेश होता है. जिससे हम एक computer Operator बन जाते है.


लेकिन इस कोर्स को करने के पहले students के मन में काफि सारे सवाल होते है. जिनके बारे में हमने निचे एक-एक करके जवाब दिया है.

Q.1) DCA कितने Year का कोर्स है?

Answer:-  चूँकि यह एक कंप्यूटर डिप्लोमा कोर्स है. इसलिए इसकी अवधि 1 साल यानि की 12 महीने होती है.

Q.2) DCA की fees कितनी होती है?

Answer:- आपके एरिया में बहुत सारे computer center हो सकते है. और सभी center के पास अलग-अलग university का लाइसेंस हो सकता है. इसलिए सभी university के अनुसार इसकी fees अलग-अलग हो सकती है. लेकिन आप किसी भी संसथान से DCA करने के लिए 12000 से 14000 रु तक की fees मान कर चलिए.

Q.3) DCA में क्या-क्या सिखाया जाता है?
 

Answer:- इसकोर्स में आपको निम्नलिखित चीजे सिखाई जाएगी:-
Q.4) Diploma in Computer Application (DCA) किस university से करना चाहिए?

Answer:- Market में आपको बहुत सारी computer course करवाने वाली कम्पनीज मिल जाएगी. लेकिन आपको सिर्फ उसी center और university से DCA करना है जो की UGC से recognized हो. ताकि भविष्य में इस सर्टिफिकेट को उपयोग करने में कोई कठिनाई नहीं आये.

आशा करता हु आप लोगो को DCA क्या है और  DCA का full form क्या है इसकी जानकारी मिल गयी होगी. लेकिन अगर अभी भी आपके मन में इससे जुड़ा कोई सवाल है तो निचे comment करे और हमसे पूछे.

Tags:- Dca kya hai, DCa ka full form kya hai, DCA meaning in hindi,

कंप्यूटर विज्ञानं में , Cache ऐसे डाटा का समूह होता है , जो पहले से ही कही संग्रहित किया जा चूका है एव उस डाटा की प्रति यह रखी गयी हो | वास्तविक डाटा को मेमोरी से एक्सेस करना अधिक महंगा होता है | दुसरे शब्दों में , Cache memory एक अस्थायी संग्रहन क्षेत्र होता है जहा पर डाटा को संग्रहित करके जल्द एक्सेस किया जा सकता है | एक बार डाटा को Cache में संग्रहित करने पर, भविष्य में जरूरत पढने पर Cache से डाटा की प्रति ले ली जाती है जिसके कारण से एक्सेस समय कम हो जाता है |
cache-memory-in-hindi

Cache memory की परिभाषा (Definition) क्या है? 

Cache memory एक Random Access Memory होती है, जिसके द्वारा कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर स्थायी की तुलना में डाटा जल्द एक्सेस कर लेता है | चूँकि माइक्रोप्रोसेसर डाटा को सर्वप्रथम Cache मेमोरी में ढूंढता है और यदि डाटा मिल जाता है उसे ज्यादा समय खर्च नही करना पड़ता है |


मेमोरी में लेवल्स का विवरण उसकी माइक्रोप्रोसेसर से निकट एवं एसेसेबिलिटी के द्वारा किया जाता है | Cache माइक्रोप्रोसेसर पर ही मौजूद चिप होती है जबकि सामान्यतः L2 एक अलग स्टेटिक रेम चिप होती है | जो मुख्य रेम होती है उसे डायनामिक रेम चिप कहा जाता है |

RAM (DRAM) Chip

Cache memory के साथ को भी हार्ड डिस्क के लिए cache मेमोरी कहा जाता है क्योंकि Cache में मौजूद सभी डाटा हार्डडिस्क से आता है और जब भी कंप्यूटर को चालू किया जाये और ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड किया जाये, Cache में भी एक विशेष क्षेत्र होता है जिसे डिस्क Cache कहा जाता है जहा पर अभी-अभी उपयोग में लाया गया डाटा रखा जाता है |

Cache मेमोरी का कार्य –

Cache Memory एक ऐसा ब्लाक होता है जहा पर डाटा को अस्थायी तोर पर संग्रहित किया जाता है जो निकट भविष्य में उपयोग में आना हो | CPU और हार्डडिस्क Cache का उपयोग निरंतर करते है, जैसा वेब ब्राउज़र एवं वेब सर्वर करते है |


Cache डाटा का समुद्र होता है, जहा पर प्रत्येक डाटा एक प्रति के रूप में होता है एवं वास्तविक डाटा कही और संग्रहित होता है | प्रत्येक डाटा में एक टैग का इस्तेमाल होता है, जो वास्तविक डाटा से मिलान के कम आता है | जब CPU, वेब ब्राउज़र, ऑपरेटिंग सिस्टम डाटा को एक्सेस करना चाहता है तो वह सर्वप्रथम Cache में ढूंढता है | यदि वह डाटा जिसको एक्सेस करना है वह टैग मिलान करके में मिल जाता है तो उसका उपयोग कर लिया जाता है | इस स्थिति Cache-hit को कहा जाता है |

यह भी पढ़े:-
कंप्यूटर क्या होता है?
कंप्यूटर कैसे सीखे
कंप्यूटर का पासवर्ड कैसे तोड़े?


इसके विपरीत स्थिति जहा पर डाटा जिसको एक्सेस करना है एवं वह मेमोरी में नही मिलता है उसे Cache miss कहा जाता है |

Caches memory के प्रकार (Types of Caches) हिन्दी में.

सर्च इंजन भी वेब pages सर्वप्रथम Cache memory में ढूढ़ते जिसे पहले से ही इंडेक्स किया गया हो | उदहारण के लिए गूगल द्वारा “Cache” लिंक का उपयोग सर्च के लिए किया जाता है |


दूसरी तरह का store होता है. “Cache” जहा पर गणना किये गए परिणामो को संग्रहित कर दोबारा उपयोग हेतु रखा जाता है | इस तरह करने से दोबारा उपयोग में आने पर समय कम लगता है |

डाटाबेस caching की सहायता से डाटाबेस एप्लीकेशन्स में काफी सुधार आया,उदाहण के लिए इंडेक्स , डाटा डिक्शनरी और अधिक उपयोग में आने वाले डाटा या उसके अंश की प्रोसेसिंग में|

Virtual Memory & Physical Memory

प्रोग्राम को स्टोर करते वक्त यह आभास होता है की उसे Contiguous एड्रेस पर रखा गया है| परन्तु वास्तव में प्रोग्राम का वह भाग जो अभी उपयोग में लाया जा रहा है उसे RAM में तथा जो अभी उपयोग में नही लाया जा रहा है उसे डिस्क में रखा जाता है |

वर्चुअल (Virtual) मेमोरी एक ऐसी कंप्यूटर आधारित तकनीक होती है जिसके द्वारा किसी भी एप्लीकेशन प्रोग्राम को यह आभास होता दिलाया जाता है की उसे Contiguous मेमोरी में रखा गया है,जबकि उस प्रोग्राम को वास्तव भोतिकी रूप से विभाजित मेमोरी में स्थान दिया जाता है, यहाँ तक की डिस्क स्टोरेज ओवरफ्लो तक हो सकता है |


इस बात पर ध्यान दिया जाये की वर्चुअल मेमोरी से तात्पर्य यह नही है कि डिस्क स्पेस का उपयोग कर भोतिक मेमरी के आकर को बढ़ाया जाये | मेमोरी को बढ़ाना, वर्चुअल मेमोरी तकनीक का एक साधारण आधार है, परन्तु इसे कुछ दुसरे तरीके से किया जाता है जो कि किसी भी प्रोग्राम और उससे सम्बन्धित डाटा को Overlay या Swapping विधि से बहार कर देता है जो अभी अनुपयोगी है | वर्चुअल मेमोरी की परिभाषा इस बात पर आधारित है कि किस तरह किसी प्रोग्राम को यह सोचने पर मजबूर किया जाये कि उसे स्टोर करने के लिए बड़े मेमोरी ब्लाक का उपयोग किया गया है, जो की Contiguous एड्रेस पर मौजूद है |

सभी नवीनतम जनरल परपस कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम वर्चुअल मेमोरी का प्रयोग साधारण एप्लीकेशन के लिए करते है, जैसे वर्ड प्रोसेससेर , स्प्रेशीत , मल्टीमीडिया प्लेयर, एकाउंटिंग इत्यादि के लिए | embedded सिस्टम या अन्य स्पेशल परपस कंप्यूटर जो अत्यधिक तीव्र गति से कार्य करते है सामान्यतः वर्चुअल मेमोरी का प्रयोग नही करते है |

Implementation विधि –

(1) Paged Virtual Memory :- वर्चुअल मेमोरी के उपयोग में, वर्चुअल एड्रेस द्वारा एप्लीकेशन प्रोग्राम को pages में विभाजित किया जाता है | पेज, वर्चुअल मेमोरी एड्रेस का एक Contigous block होता है | सामान्यतः पेज का साइज़ 4Kb होता है और ऐसे सिस्टम जिसकी वर्चुअल एड्रेस की क्षमता ज्यादा होती है| या रियल मेमोरी की क्षमता ज्यादा होती है (e.g. RAM) का साइज़ भी बड़ा होता है |


(2) Page Tables :- लगभग सभी जगह टेबल का उपयोग वर्चुअल एड्रेस को Physical एड्रेस में बदलने के लिए किया जाता है (जिसे “real address” भी कहा जाता है ) और इसका उपयोग हार्डवेयर द्वारा निर्देशों को प्रोसेस करने के लिये किया जाता है | पेज टेबल में प्रत्येक निर्देश , यह निर्देशित करते ही की उस पेज का शुरूआती वर्चुअल एड्रेस क्या है –या तो वास्तविक मेमोरी एड्रेस जहा पर पेज वास्तव मे स्टोर किया गया है और या इस बात को निर्देशित करता है की पेज डिस्क में अभी कहा रखा है |

किसी भी सिस्टम में या तो सिर्फ एक पेज टेबल रहती है या प्रत्येक एप्लीकेशन की अलग पेज टेबल हो सकती है |

(3) पेजिंग (Paging) :- पेजिंग वेह तकनीक होती है जिसके द्वारा ऐसे pages को वर्चुअल मेमोरी से डिस्क में लाया जाता है जो अभी उपयोग में नही है तथा फिर से उसे वास्तविक मेमोरी में स्टोर कर दिया जाता है ताकि आवश्यकता होने पर बुलाया जा सके |

(4) डायनामिक एड्रेस translation :-
जब CPU वर्चुअल एड्रेस पर मौजूद किसी निर्देश को बुलाता है या, किसी निर्देश को execute करता है या किसी डाटा को वर्चुअल एड्रेस पर स्टोर करता है ,तब वर्चुअल एड्रेस को भोतिक एड्रेस में बदल दिया जाता है| यह सब कार्य हार्डवेयर द्वारा किया जाता है जिसे कई बार मेमोरू मैनेजमेंट यूनिट भी कहा जाता है | यदि पेज टेबल यह करता है की वास्तविक मेमोरी में वह वर्चुअल मेमोरी पेज अभी मौजूद नही है तब हार्डवेयर द्वारा पेज फाल्ट घोषित किया जाता है |


(5) सेगमेंटेड वर्चुअल मेमोरी :- कुछ सिस्टम , जैसे Burroughs, वर्चुअल मेमोरी के लिए पेजिंग का उपयोग नही करते है| ऐसे सिस्टम सेगमेंटेशन का उपयोग करते है, जिसके द्वारा किसी भी एप्लीकेशन का वर्चुअल एड्रेस को अनिश्चित लम्बाई के सेगमेंट में बाँट दिया जाता है | इस वर्चुअल एड्रेस में सेगमेंट नंबर और सेगमेंट के अंदर का आफसेट होता है |

 दोस्तों अगर आपको हमारा लेख Cache memory in hindi में आपको कैसे लगा हमे comment कर जरुर बताये. इसी तरह की और भी लेख पाने के लिए आज ही हमारी वेबसाइट को फ्री में subscribe करे.

Tags:- cache memory kya hai, cache memory in hindi, cache memory ki jankari, cache hindi me,

अगर आप कंप्यूटर मेमोरी in हिन्दी में जानना चाहते है तो आप बिलकुल सही लेख पढ़ रहे है. क्योंकि यहाँ पर आपको मेमोरी से related पूरी जानकारी मिलने वाली है. यहाँ पर हम आपको मेमोरी क्या होती है, RAM क्या है, ROM क्या है, Static और Dynamic computer मेमोरी की पूरी जानकारी देने वाला हु.
compute-memory-in-hindi-me-jane

कंप्यूटर मेमोरी in हिन्दी में विस्तृत जानकारी

किसी डाटा को छोटा अथवा लम्बे समय तक कंप्यूटर द्वारा संग्रहित करके रखने की क्षमता को मेमोरी कहते है. Computer की memory, कंप्यूटर का का आंतरिक अंग होती है | यह मेमोरी दो प्रकार की होती है : प्रायमरी या सेकंड्री | प्रायमरी मेमोरी वह होती है ,जिससे CPU द्वारा सीधा सम्पर्क किया जा सकता है , इसकी गति तेज होती है | प्रायमरी मेमोरी स्थायी भी हो सकती है अथवा अस्थायी भी | अस्थायी मेमोरी में डाटा तब तक संग्रहित रहता है ,जब तक उसे electricity उपलब्ध रहती है | इसके विपरीत कंप्यूटर में Secondary memory भी हो सकती है, जो की स्थायी होती है,परंतु इसकी गति प्रायमरी मेमोरी की अपेक्षा धीमी होती है |
शुरुआत के कंप्यूटर प्रायमरी मेमोरी के रूप में ड्रम मेमोरी , कोर मेमोरी अथवा बबल मेमोरी तकनीक का प्रयोग करते थे | वर्तमान युग के कंप्यूटर में RAM ( Random access memory ) तथा ROM (read only memory) का प्रयोग किया जाता है , जो की Integrated Circuits (IC) तकनीक पर आधारित होते है |

RAM memory क्या होती है? Random Access Memory in हिन्दी

RAM कंप्यूटर का वह हिस्सा होता है ,जहा पर उसके द्वारा वर्तमान में एक्जक्यूट किये जा रहे प्रोग्रामो तथा प्रयोग में लाये जा रहे डाटा को संग्रहित किया जाता है | जैसा की इसके नाम से जाहिर है RAM एक ऐसी मेमोरी होती है जिसमें संग्रहित डाटा को सीधे पढ़ा अथवा लिखा जा सकता है | RAM की प्रत्येक इकाई का एक अद्वितिय पता होता है , जिसके द्वारा उसे सीधे प्रयोग में लाया जा सकता है | RAM की प्रक्रति अस्थायी (volatile) होती है अर्थात इस पर संग्रहित डाटा विधुत प्रदाय समाप्त होने पर विलुप्त हो जाता है |
computer-memory-ram-in-hindi

RAM दो प्रकार की होती है स्टेटिक (SRAM) तथा डायनामिक RAM (DRAM).



(अ) Static RAM ( SRAM ) :- यह RAM का एक प्रकार है | यह अस्थायी प्रक्रति की होती है , परन्तु DRAM के सामने इसके डाटा को refresh करने की आवश्यकता नही होती | इसमें डाटा तब तक संग्रहित रहता है , जब तक विधुत प्रदाय होता रहता है | SRAM तीव्र परन्तु काफी महंगी होती है | सामान्यतः इसका प्रयोग प्रोसेसर की cache memory के लिए होता है | SRAM Synchronous अथवा Asynchronous प्रकार की होती है |
(ब) डायनामिक RAM :- इस RAM को Dynamic कहा जाता है , क्योंकि इसे लगातार Refresh करते रहना पड़ता है , अन्यथा इसमें संग्रहित डाटा विलुप्त हो जाता है | रेफ्रेशिंग के दोरान DRAM में उपस्थित डाटा को पढकर उसे तुरंत पुनः लिख दिया जाता है | यह अस्थायी मेमोरी होती है अत: इसे सतत विधुत शक्ति की आवश्यकता होती है | DRAM अत्यधिक सूक्ष्म केपेसिटर दे बनी होती है | प्रत्येक केपेसिटर धीरे धीरे अपनी उर्जा खोता है , इसी कारण से DRAM को रिफ्रेश करने की आवश्यकता होती है |

यह भी पढ़े:-

✔  Excel में बिल कैसे बनाये?
✔  टाइपिंग स्पीड कैसे बढ़ाये?
Function keys की जानकारी

DRAM, SRAM की अपेक्षा सस्ती होती है ,परन्तु धीमी होती है | DRAM के कई प्रकार है , जैसे : Extended Data Out (EDO) DRAM, Synchronous DRAM ( SDRAM ) , Double Data Rate ( DDR ) DRAM आदि |

Rom  memory क्या होता है? Read Only Memory in हिन्दी

जैसा की इसके नाम से ही ज्ञात होता है कि इस प्रकार की memory को केवल पढ़ा जा सकता है , उस पर कुछ लिख पाना सम्भव नही है | इस मेमोरी की प्रक्रति स्थायी या अश्थायी होती है अर्थात इस पर लिखा डाटा electricity प्रदाय समाप्त होने के पश्चात भी विलुप्त नही होता | ROM पर उपलब्ध डाटा को पूर्ण रूप से ROM चिप पर Embed कर दिया जाता है |
कुछ प्रकार की रोम पर लिखे डाटा को कुछ विशेष उपकरणों के द्वारा बदला जा सकता है,परन्तु एक बार लिखने के पश्चात इसका डाटा सीधे यूजर द्वारा परिवर्तित नही किया जा सकता | यह भी Random Access प्रक्रति की होती है | ROM पर लिखे डाटा को भी प्रोसेसर द्वारा सीधे पढ़ा जा सकता है | विभिन्न प्रकार के रोम निम्नलिखित है :
computer-memory-rom-in-hindi
(a) Programming ROM ( PROM ) :- PROM का अर्थ programmable Read Only Memory होता है | ROM चिप के विपरीत निर्माता इस चिप को बिना किसी डाटा के प्रदान करते है | कोई भी यूजर अपनी आवश्यकतानुसार PROM प्रोग्रामर नामक उपकरण का प्रयोग कर इस पर डाटा लिख सकता है | PROM प्रोग्रामर उच्च वाल्टेज के करंट का प्रयोग करके रोम चिप पर सर्किट बना अथवा हटा सकता है | चूकि इसे केवल एक बार ही लिखा जा सकता है ,इसलिए इसे One Time Programmable (OTP) ROM भी कहा जाता है |
(B) Erasable Programmable Read Only Memory ( EPROM ):- यह PROM से भिन्न होता है , क्योंकि इस पर एक से अधिक बार प्रोग्राम अथवा डाटा लिखा जा सकता है | किसी EPROM का डाटा उसे शक्तिशाली पराबैंगनी विकिरण में रखकर हटाया जा सकता है | एक EPROM चिप पर डाटा लिखने अथवा हटाने के लिए EPROM प्रोग्रामर नामक उपकरण का प्रयोग किया जाता है |

(C) Electrically Erasable Programmable Read Only Memory ( EEPROM ) :- एक EEPROM चिप EPROM के समान ही कार्य करता है , क्योंकि इस पर भी बार बार डाटा अथवा प्रोग्राम को लिखा जा सकता है | इस पर उलब्ध डाटा को हटाने के लिए तथा उसे पुनः लिखने के लिए विधुत धरा का प्रयोग किया जाता है | EPROM चिप के विपरीत किसी EEPROM चिप डाटा लिखने अथवा हटाने के लिए उसे बार बार कंप्यूटर से बहार नही निकलना पड़ता है |

आशा करता हु आप लोगो को कंप्यूटर मेमोरी in हिन्दी में अच्छे से समझ में   आ गया होगा. अगर आपको computer memory से सम्बंधित कोई सवाल है तो हमे comment कर जरुर बताये. हम आपकी comment का रिप्लाई जरुर करेंगे.

Tags: Computer memory in hindi, computer memory kya hota hai, RAM in hindi, ROM in hindi,

नमस्कार दोस्तों, पिछली post में हमने सिखा था की किस तरीके से हम कंप्यूटर चालू कर सकते है. और आज की इस पोस्ट में हम आपको laptop/कंप्यूटर को बंद करना सिखाने वाले है.

जब हम कंप्यूटर पर काम करते है और अगर हमारा काम पूरा हो जाये तो हमे कंप्यूटर बंद कर देना चाहिए. क्योंकि अगर हम फिजूल में इसे चालू रखेंगे तो electricity use होगी और बिल बढेगा. और अगर ऐसे में सीधे power cut हो जाती है तो यह कंप्यूटर सिस्टम के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए काम पूरा होने के बाद आपको जरुरी रूप से कंप्यूटर बंद कर देना चाहिए. लेकिन अगर आपको कंप्यूटर इसकी कोई जानकारी नहीं है तो इस पोस्ट में हम कंप्यूटर turn off कैसे करते है की पूरी जानकारी देने वाले है.
computer-band-kaise-kare

Computer बंद कैसे करते है?

विंडोज कंप्यूटर या laptop को बंद करना बहुत ही आसानी है. यहाँ पर हम आपको कंप्यूटर turn off करने के २ तरीके बताने वाला हु.

1. Manually तरीके से कंप्यूटर बंद कैसे करते है?

विंडोज 7:-
1. सबसे पहले टास्कबार के स्टार्ट बटन पर क्लिक करे.
computer-band-karna-sikhe
 2. स्टार्ट बटन को क्लिक करने से स्टार्ट मेनू खुल जायेगा. तो अब स्टार्ट मेनू से Shut Down पर क्लिक कर दीजिये.

विंडोज 10:-

1. टास्कबार के left hand side में दिख रहे windows बटन पर right क्लिक करे.

2. यहाँ पर आपको shut down or sign out का आप्शन मिलेगा. तब इस पर क्लिक करे और Shutdown को सेलेक्ट करे लीजिये.
windows-10-band-kaise-kare

2. Shortcut तरीके से computer कैसे बंद करते है?

अगर ऊपर बताई मैन्युअली प्रोसेस को follow नहीं करना चाहते है तो आप शॉर्टकट तरीके से भी कंप्यूटर को बंद कर सकते है.

Windows Xp और windows 7:-

1. शॉर्टकट तरीके से कंप्यूटर को बंद करने के लिए हमे keyboard की हेल्प लेना होगी. इसके लिए सबसे पहले Alt बटन के साथ F4 दबाये. Alt+F4


2. ऊपर बताई key को दबाने से एक windows बॉक्स आ जायेगा जिसमे shutdown को सेलेक्ट करे और Enter कर दीजिये.
alt-f4-se-computer-shutdown-kare

Windows10:-

अगर आप windows 10 ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोग करते है और शॉर्टकट तरीके से laptop बंद करना चाहते है तो windows key के साथ X दबाये. Windows key+X

ऊपर बताई key को press करने से एक menu open हो जायेगा. अब कीबोर्ड से up arrow key ↑ को 2 बार press करे और फिर left side arrow → की हेल्प से shut down or sign out में जाये और arrow की हेल्प से shut down को सेलेक्ट करे और फिर enter कर दीजिये.
windows-ko-shortcut-se-band-kaise-kare
 तो दोस्तों इस तरीके से आप किसी भी windows कंप्यूटर को बंद कर सकते है. यहाँ पर हमने दोनों तरीके से turn off करना सिखाया है. आपको कोनसा तरीका पसंद आया है हमे comment कर जरुर बताये.

नमस्कार, अभी तक कि पोस्ट में हमने कंप्यूटर क्या होता है कैसे काम करता है, माउस क्या होता है, keyboard क्या होता है, ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में पूरी जानकारी पढ़ ली है! कंप्यूटर सिस्टम कि इन सभी बेसिक जानकारियों के बाद हम कंप्यूटर को ऑन/ऑफ या फिर एसा कहे कि कंप्यूटर को चालू/बंद कैसे करते है जाने वाले है ! अगर आप कंप्यूटर और इसके डिवाइस के बारे में नहीं जानते है तो हमारी निचे दी गयी पोस्ट को जरुर पढ़े इसमें हमने विस्तार से कंप्यूटर और उसके उपकरण के बारे में बताया है !

    कंप्यूटर चालू कैसे करते है ? How To Turn On Computer in Hindi ?


    COMPUTER-START-ON-KARNE-KA-TARIKA
    दोस्तों अगर हमे कंप्यूटर पर कोई भी काम करना होता है तो पहले हमे उसे चालू/ऑन करना होता है उसके बाद में ही हम कंप्यूटर को उसे कर सकते है कंप्यूटर को स्टार्ट करना बहुत ही आसन है बस इसके लिए आपको पहले निचे बताई गयी कुछ चीजो को करना है उसके बाद में आप बड़ी आसानी से अपने कंप्यूटर सिस्टम को स्टार्ट कर सकते है !
    • कंप्यूटर में पॉवर केबल ठीक से कनेक्टेड है या नहीं अगर नहीं तो उसे ठीक से कनेक्ट कर अगर पॉवर रेगुलर सप्लाई नहीं होगी तो कंप्यूटर ठीक से स्टार्ट नहीं हो पायेगा !
    • कंप्यूटर के दुसरे जरुरी उपकरण जैसे - keyboard, माउस, VGA cable ठीक से कनेक्टेड होना चाहिए !
    • CPU को ऐसी जगह रखे जहा से उसे थोड़ी हवा भी लगती रहे ताकि लगातार चलने के बाद वो ज्यादा गर्म न हो जाये वेसे तो कंप्यूटर को इतने में कोई फर्क नहीं पड़ता है मगर आप लगातार कंप्यूटर को उसे करने वाले है तो इस बात का थोडा सा ध्यान रखे !
    1. ऊपर बताई सभी चीजो को ठीक से चेक कर लीजिये.

    2. अब आपको Cabinet/Case बॉक्स के सामने दिख रहे एक स्विच/बटन को दबाना है, कैबिनेट पर आगे कि साइड 2 स्विच लगे हुए एक तो स्टार्ट बटन और दूसरा रीस्टार्ट बटन ! स्टार्ट बटन, रीस्टार्ट कि तुलना में साइज़ में थोडा बड़ा होता है तो स्टार्ट का बड़ा वाला बटन दबाये !
    COMPUTER-ME-START-AUR-RESTART-BUTTON
    3. अब आपका कंप्यूटर कुछ ही सेकंड्स  में ऑन हो जायेगा और ऑपरेटिंग सिस्टम का Logo दिखाई देगा अब आप अपने कंप्यूटर का उपयोग कर सकते है !

    आपको हमारी यह पोस्ट केसी लगी हमे कमेंट करके जरुर बताये !

    टॉपिक चुने

    Internet

    Internet ke bare me padhe.

    Computer

    Computer ki Puri jankari.

    Mobile

    Mobile Tips and Tricks ki jankari

    Facebook

    Facebook ki puri jankari

    Whatsapp

    Whatsapp all Tips and Tricks

    Banking

    Banking ki jankari


    Subscribe Our