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नमस्कार मित्रो, अभी तक हमने कंप्यूटर क्या होता है कैसे काम करता है, software क्या होता है, ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है के बारे में जाना है और आज हम इसी Series को आगे बढ़ाते हुए कंप्यूटर के parts मतलब Parts Of Computer के बारे में जानेंगे जिसमे हम आपको बताएँगे कि कंप्यूटर सिस्टम के लिए क्या चीजे जरुरी होती है और कंप्यूटर के विभिन्न भागो और उनके नामो के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है !
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कंप्यूटर के parts क्या है ? What is the Parts of Computer in Hindi?

जेसा कि मैंने आपको पहले बताया था अगर कंप्यूटर के लिए software उसकी आत्मा है तो हार्डवेयर उसका शरीर होता है ! मतलब वो चीजे जिनका सिर्फ कंप्यूटर उपयोग कर सकता है software कहलाते है और वे सभी parts/ भाग जिन्हें हम छू कर सकते है और जरुरत पड़ने पर उन्हें चेंज भी कर सकते है हार्डवेयर कहलाते है और आज हम उन्ही भागो के बारे में और भी अधिक जानकारी से जानेंगे और कंप्यूटर सिस्टम में कंप्यूटर parts के उपयोग के बारे में जानने वाले है !
  
1. मदर बोर्ड (Mother Board) :-
मदर बोर्ड कंप्यूटर सिस्टम में मेनेजर के रूप में काम करता है, मदर बोर्ड पर ही हार्ड डिस्क, CPU, RAM, Processor, Cables और अन्य सभी तरह के भागो को जोड़ा जाता है यहाँ पर कंप्यूटर के सभी कनेक्शन सीधे कनेक्टेड  मिलते है और मदर बोर्ड कि मदद से अपना काम पूरा करते है !

2. पॉवर सप्लाई ( Power Supply ) :-
Power supply, इसे  SMPS ( Switched Mode Power supply ) कहते है यह पुरे कंप्यूटर के सभी हार्डवेयर और डिवाइस में electricity या बिजली सप्लाई करने का काम करता है ! SMPS कंप्यूटर में बिजली के नियमन को बनाये रखता है और एक नियमित रूप में बिजली देता है ! 

3. प्रोसेसर (Processor) :-
Processor, कंप्यूटर का मस्तिष्क ( Brain ) कहलाता है क्योंकि यह कंप्यूटर में हो रही सभी गतिविधियों का नियंत्रण करता है और कंप्यूटर के सभी काम जैसे - प्रोसेस पर काम करना, task को पूरा करना औरे ऑपरेशन को पूरा करने जेसे काम करता है !
    4. Monitor/Display ( डिस्प्ले ) :-
    डिस्प्ले एक आउटपुट डिवाइस होता है जो हमारे द्वारा दिए जा रहे instruction पर काम करके output के रूप में रिजल्ट Screen पर प्रदर्शित करता है !

    5. कीबोर्ड (Keyboard) :-
    keyboard एक इनपुट डिवाइस होता है जिसका उपयोग कंप्यूटर को instruction देने के लिए किया जाता है keyboard कि मदद से हम कंप्यूटर को कोई भी key ( बटन ) दबाकर अपना काम करवा सकते है और टाइपिंग जेसे आदेश देने के काम करवा सकते है !

    6. माउस:- 
    माउस एक इनपुट डिवाइस है जो कंप्यूटर पर पॉइंटर डिवाइस कि तरह काम करता है यह हमे स्क्रीन पर एक तीर के चिन्ह के रूप में दिखाई देता है इसका उपयोग हम कंप्यूटर किसी भी ऑब्जेक्ट को सेलेक्ट करने और file के विकल्प को खोलने के लिए किया जाता है इसमें कुल 3 बटन होते है- लेफ्ट बटन, राईट बटन और व्हील!
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    7. हार्ड डिस्क ड्राइव ( Hard Disk Drive ) :-
    हार्ड डिस्क एक स्टोरेज डिवाइस होता है जिसमे हम अपने कंप्यूटर के डाटा को स्टोर करके रख सकते है और हार्ड डिस्क में हमारे कंप्यूटर का ऑपरेटिंग सिस्टम ( OS ) इन्सटाल्ड होता है जिससे हमारा कंप्यूटर चलने लायक बन पता है !

    8. RAM (रेम) :-
    RAM फुल फॉर्म Random Access Memory होता है जिसका उपयोग कंप्यूटर में एप्लीकेशन और प्रोग्राम को लोड करने में किया जाता है ! कंप्यूटर शुरू होते समय प्रोग्राम्स सबसे पहले मेमोरी में लोड होते है और फिर उसके बाद ही हम उसे चला पते है ! यह हमारे कंप्यूटर कि स्पीड को बढ़ाने और तेजी से काम करने में हमारी मदद करता है !
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    9. CD/ Dvd Drive :-
    यह एक तरह का ड्राइव होता है जिसका उपयोग हम कंप्यूटर में सीडी को Read/Write करने में करते है ! यह सीडी पर लिखे हुए डाटा को पढ़ती है और कंप्यूटर को बताता है जरुरत पड़ने पर हम cd drive कि मदद से cd के डाटा को कंप्यूटर में कॉपी भी कर सकते है !

    10. स्पीकर ( Speaker ) :-
    स्पीकर एक ऑडियो डिवाइस है जो यूजर द्वारा कंप्यूटर में चलाये जा रहे song/audio को यूजर के सुनने लायक बनाता है !

    दोस्तों इसके आलावा और भी कंप्यूट के कुछ भाग होते है पर हमने यहाँ पर कंप्यूटर के खास भागो के बारे में जानकर share कि है जिनका उपयोग कंप्यूटर को पड़ता है और जिनके बिना कंप्यूटर नहीं चल सकता है !

    नमस्कार, आज हम जानेंगे Mouse क्या होता है और कैसे काम करता है, mouse कितने प्रकार के होते है !कंप्यूटर/लैपटॉप में माउस क्या काम करता है ! दोस्तों जब कभी भी आपने कंप्यूटर देखा होगा तो हर बार आपने कंप्यूटर  में वायर के साथ कनेक्टेड एक छोटा-सा चूहे की तरह दिखने वाला डिवाइस भी साथ में देखा होगा इसे माउस कहते है ! तो चलिए जानते है माउस के बारे में What is Mouse in Hindi ?
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    Mouse क्या होता है ? माउस कितने प्रकार का होता है ?

    माउस एक Pointing डिवाइस होता है और यह एक इनपुट डिवाइस होता है जिसका उपयोग स्क्रीन पर प्रदर्शित कर्सर ( Arrow ) को ऊपर-निचे या चलाने के लिए किया जाता है ! माउस एक छोटा सा उपकरण होता है जिसे चपटी सतह या माउस पेड पर रखकर चलाया जाता है ! इसका नाम " माउस " इसके आकर तथा इससे जुडी लम्बी केबल के कारण  होता है! जैसे-जैसे हम माउस की पोजीशन में परिवर्तन करते है, screen पर कर्सर की स्तिथि में भी उसी दिशा में परिवर्तित होती है !
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    माउस के ऊपर कुछ बटन लगे होते है जिनका कार्य current ( वर्तमान ) में चल रहे प्रोग्राम पर depend करता है! माउस में 3 बटन होते है, Left बटन और Right बटन, एक स्क्रॉल व्हील भी लगा होता है जिसके द्वारा हम बड़े डॉक्यूमेंट को स्क्रॉल कर सकते है ! बाजार में 2 तरह के माउस प्रचलन में है जिनके नाम हमने निचे बताये है !

    Mouse कितने प्रकार के होते है ?

    1. Mechanical Mouse ( मैकेनिकल माउस ) :- एक मैकेनिकल माउस में एक बॉल का प्रयोग होता है तथा दो रोलर लगे होते है जोकि माउस की गति और स्तिथि की जानकारी देते है ! इन रोलरो से एक डिस्क जुडी होती है जिसकी परिधि पर छेद होता है ! इस डिस्क के दोनों ओर एक इंफ्रारेड LED तथा एक इंफ्रारेड सेंसर लगा होता है ! डिस्क पर उपस्तिथ होल्स के कारण LED से उत्सर्जित किरण सेंसर तक पहुँचती है ! जब यूजर माउस को माउस पेड़ पर चलाता है तब बोल के घूमने के कारन रोलर तथा रोलर के साथ जुडी डिस्क घूमती है ! इस कारण  से LED के द्वारा उत्पन्न सिग्नल सेंसर तक पहुंच पाते है, जहा से इन्हे माउस के बोर्ड पर स्तिथ प्रोसेसर पर भेज दिया जाता है ! यह प्रोसेसर  इन सिग्नल को बाइनरी डाटा में convert कर कंप्यूटर में भेज देता है, जिससे कंप्यूटर कर्सर की स्तिथि परिवर्तित कर देता है !

    2. Optical Mouse ( ऑप्टिकल माउस ) :- एक ऑप्टिकल माउस के निचले भाग पर एक LED तथा सेंसर लगा होता है, जोकि mechanical माउस की तरह ही कार्य करता है ! जब भी माउस को किसी सतह पर घुमाया जाता है तब इस LED से उत्पन्न किरण को  सतह द्वारा सेंसर पर परावर्तित कर दिया जाता है व सेंसर इसे प्रोसेसर पर भेज देता है ! ऑप्टिकल माउस मैकेनिकल माउस की तुलना में अधिक सुविधाजनक होता है क्योंकि  इन्हे चलाने के लिए किसी विशेष प्रकार के माउस पेड़ की आवश्यकता नहीं होती तथा इन्हे किसी भी सतह पर प्रयोग में लाया जा सकता है साथ ही सतह तथा माउस के मध्य उसका सीधा संबंध न होने के कारण  इस माउस को अधिक समय तक प्रयोग में लाया  सकता है तथा रख-रखाव की भी आवश्यकता भी काम होती है !

    आपको माउस के बारे में  जानकारी केसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये और इस पोस्ट को शेयर जरूर करे। 

    नमस्कार दोस्तों, अभी तक हमने कंप्यूटर, software, हार्डवेयर के बारे में समझ लिया है अब हम कंप्यूटर का एक और महत्वपूर्ण Part keyboard के बारे में जानेंगे ! इस पोस्ट में हम आपको keyboard क्या होता है? keyboard किस तरह का डिवाइस होता है, keyboard में बटन के बारे में पूरी जानकारी बताने वाले है और साथ ही keyboard कितने प्रकार के होते है यह भी बताने वाले है ! अगर आप keyboard के बारे में नहीं जानते है तो हमारी इस पोस्ट को आखिरी तक जरुर पढ़े !
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    Keyboard क्या होता है | What is Keyboard in Hindi |

    keyboard जेसा कि इसके नाम से पहचाना जा सकता है कि keyboard एक ऐसा डिवाइस जिसमे keys लगी होती है ! keyboard एक इनपुट डिवाइस होता है! keyboard कंप्यूटर के लिए सर्वाधिक उपयोग में लाया जाने वाला इनपुट डिवाइस होता है ! कंप्यूटर के keyboard का प्रारूप टाइपराइटर के keyboard के सामान ही होता है ! वर्तमान में प्रचलित keyboard को QWERTY कहा जाता है ! इसका यह नाम keyboard के बाई और कि ऊपर कि पंक्ति के प्रथम छः शब्दों से मिलकर बना होता है, QWERTY keyboard के अतिरिक्त अन्य keyboard भी उपलब्ध होते है जैसे कि – Dvorak, AZERTY keyboard. एक keyboard पर टाइपराइटर कि सभी keys के साथ-साथ कुछ विशिष्ट keys भी होती है ! keyboard कि keys उपयोग के आधार पर इन्हें कुछ अलग-अलग नामो में बांटा जाता है !

    keyboard के बटन/स्विच के नाम Name of the Keyboard Keys in Hindi?

    Alphanumeric Key:- A से लेकर Z, 1 से लेकर 0 तथा स्पेस बार इस समूह में आते है ! keyboard में इसके अतिरिक्त एक नुमेरिक पेड भी होता है जिसे अंक ( Number ) इन्पुटर करने के लिए किया जाता है ! Num lock को Num lock key से कण्ट्रोल यानि कि ऑन/ऑफ किया जाता है !

    Enter key:- टेक्स्ट एप्लीकेशन में इसके द्वारा पैराग्राफ अथवा लाइन को ख़तम करने में किया जाता है ! डाटा एप्लीकेशन में यह किसी फील्ड में डाटा इनपुट ख़त्म होने को प्रदर्शित करती है !

    Arrow key:- keyboard में4 एरो बटन होते है जिनका उपयोग एक अक्षर या लाइन पर आगे-पीछे व ऊपर निचे करने के लिए किया जाता है !

    Cursor keys:- कर्सर को चलाने  के लिए keyboard में कर्सर keys होती है! home और end key का उपयोग किसी लाइन के शुरू तथा अंत में जाने के लिए किया जाता है ! Page up/down key के द्वारा कर्सर को एक पेज अथवा स्क्रीन को ऊपर निचे करने के लिए किया जाता है !

    Function Keys:- यह 12 keys होती है विभिन्न प्रोग्राम में इसका उपयोग अलग-अलग तरीको से होता है ! यह F1 से F12 तक होती है !

    Back Space/delete key:- इस key का उपयोग back ( पीछे ) जाने के लिए किया जाता है इस बटन कि मदद से लिखे हुए वर्ड को डिलीट किया जा सकता है !

    Shift key:- इस key का उपयोग शब्दों को capital (A B C ) लिखने में किया जाता है अगर हम शिफ्ट के साथ कोई बटन दबाते है तो वो शब्द capital में शो होगा और इसका उपयोग alphanumeric key के ऊपर लगे हुए चिन्ह को लगाने में किया जाता है !

    Tab key:- इस key का प्रयोग प्रोग्राम में एक बॉक्स से दुसरे बॉक्स में जाने के लिए किया जाता है और टेक्स्ट डॉक्यूमेंट में इस key का प्रयोग अधिक स्पेस देने के लिए किया जाता है !

    Caps lock key:- अगर हम इस key को ऑन कर देते है तो सभी alpha word capital में टाइप होंगे !

    Ctrl key:- इस key का उपयोग मल्टीप्ल object को सेलेक्ट करने में और shortcut key के रूप में इसका उपयोग किया जाता है !

    Alter key:- Alter key  का उपयोग file and folder के विकल्प को खोलने में application में  shortcut के रूप में इसका उपयोग होता है !

    Windows key:- windows key का उपयोग start menu ओपन करे और windows shortcut key के साथ में इसका उपयोग किया जाता है !

    Num lock key:- keyboard के राईट साइड के numeric कीपैड को चलने के लिए हमे इस बटन या lock key को ऑन करना होता है इसके बाद ही हम इस पेड का उपयोग कर सकते है !

    Keyboard कितने प्रकार के होते है ? Types of Keyboard  

    मेम्ब्रेन कीबोर्ड्स:- यह keyboard सबसे अधिक उपयोग किये जाने वाला keyboard है इसकी रचना कुछ इस प्रकार होती है कि साडी keys रबर डोम के ऊपर लगी होती है, यह एक त्रि-स्तरीय, प्लास्टिक कि झिल्ली के ऊपर अवस्थित होता है, यह झिल्ली पुरे keyboard फेली होती है जब भी कोई यूजर key दबाता है तो रबर डोम के ऊपर स्थित संपर्क बिंदु, झिल्ली कि उपरी सतह को मध्य के छिद्र में दबाकर निचली सतह से स्पर्श करता है, जिससे उनमे स्थित electricity सर्किट पूर्ण हो जाता है ! इससे उत्पन्न होने वाले संकेत को कंप्यूटर पर भेज दिया जाता है !

    मैकेनिकल कीबोर्ड्स:- यह keyboard मेम्ब्रेन keyboard के समान प्रत्येक key हेतु एक ही माध्यम के स्थान पर स्वतन्त्र स्विच का प्रयोग किया जाता है ! सामान्यतः मैकेनिकल keyboard में, एक धातु कि स्प्रिंग या इसके सद्रश्य अन्य किसी माध्यम का प्रयोग key कि गति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है ! यह मेम्ब्रेन keyboard में महंगा होता है और इसका प्रयोग तेज गति में टाइप करने वाले typist करते है !

    आपको हमारी यह पोस्ट केसी लगी हमे कमेंट करके जरुर बताये और इसे अपने दोस्तों के साथ share भी जरुर करे . 

    नमस्कार दोस्तों, क्या आप कंप्यूटर में रूचि रखते है और कंप्यूटर की जानकारी जानना चाहते है. लेकिन आपको कंप्यूटर के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. तो आपको किसी भी बात की कोई चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है. क्योंकि इस पोस्ट में हम आपको Computer की basic जानकारी दे देंगे की आपको कंप्यूटर क्या है, RAM क्या होता है, Motherboard क्या है, Display/Monitor क्या होता है, keyboard क्या है, माउस क्या है, Drive क्या होता है की पूरी जानकारी हो जाएगी.
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    तो दोस्तों अधिक समय न लेते हुए इसके बारे में जानना शुरू करते है. लेकिन इसके पहले मैं आपको computer की परिभाषा बताना चाहता हु क्योंकि ताकि आप Computer के बारे में और अच्छे से समझ सके.

    Computer क्या होता है?

    Computer एक advance इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो user से input device की मदद से डाटा लेता है और फिर उस पर किसी software की मदद से प्रोसेस करता है और फिर Output device पर user के समझने लायक भाषा में परिणाम देता है और भविष्य के लिए डाटा को Store करता है कंप्यूटर कहलाता है.
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    Computer की बेसिक जानकारी in हिन्दी

    दोस्तों जब आप कंप्यूटर को देखते होंगे तो आपको कंप्यूटर desk पर 4 चीजे दिखती होगी. 1. CPU Cabinet 2. Monitor 3. Keyboard 4. Mouse सबसे पहले मैं आपको इन 4 बाहरी चीजो के बारे में बताने वाला हु. ताकि आपको कंप्यूटर की जानकारी हो सके.

    1. CPU/Cabinet System (सी पी यु)

    यह कंप्यूटर का सबसे important पार्ट होता है. क्योंकि इसके अन्दर ही वो सभी पार्ट्स (CPU, Motherboard, RAM, ROM, HDD) होते है जो की कंप्यूटर की कार्य प्रणाली को सम्हालते है. ऊपर बताये सभी internal पार्ट्स होते है जो की cabinet के अन्दर होते है.
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    2. Monitor/Display/Screen (मॉनिटर)

    Monitor यह एक output device होता है, क्योंकि CPU द्वारा प्रोसेस की गयी सभी चीजो का result हमे display करता है. हम जो कुछ भी काम करते है वो सब कुछ हमे display पर दिखाई देता है. जैसे- Painting, Typing, Mouse status और वो सब कुछ जो हम कंप्यूटर पर करते है.

    3. Keyboard (कीबोर्ड)

    यह एक input device होता है, क्योंकि इसकी मदद से हम कंप्यूटर को instruction (आदेश) देते है. Keyboard user द्वारा दिए गए आदेशो को accept करता है और फिर CPU को प्रोसेस के लिए send करता है. इसमें 104 buttons होते है. जिसमे A to Z, Control keys, Arrow keys, Numbers and characters, Numeric keypad, Function keys आदि शामिल होते है. दोस्तों अगर आप कंप्यूटर की पूरी जानकारी जानना चाहते है और इसमें  विशेष रूचि रखते है तो आपको पुरे keyboard के बारे में भी जरुर जानना चाहिए.
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    यह भी पढ़े:-
    4. Mouse (माउस)

    माउस एक तरह का Pointing & object selecting device होता है. यह एक input device है, इसकी मदद से हम कंप्यूटर पर दिख रही किसी भी चीज को सेलेक्ट कर सकते है. हम माउस को जिस ओर ले जाते है display में दिख रहा cursor भी उसी दिशा में चलता जाता है.

    Mouse में तीन button होते है:- Left key, Right key, Scroll bar. माउस को चलने के लिए हमे plan surface की जरुरत पड़ती है.

    Computer के Internal parts की जानकारी

    जैसा की मैंने आपको अभी ऊपर बताया था की हमारा कंप्यूटर और भी बहुत सारी छोटी-छोटी चीजो से मिलकर बना होता है. जिसमे हर किसी का important रोल होता है. जिन्हें हम कंप्यूटर hardware parts कहते है. Keyboard और mouse भी हार्डवेयर parts की गिनती में ही आते है.

    1. CPU

    यह कंप्यूटर सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट होता है. क्योंकि कंप्यूटर की सभी गतिविधियाँ यही से संचालित होती है. CPU कंप्यूटर का brain (दिमाग) कहलाता है. यह user द्वारा दिए गए आदेशो का पालन करता है और उन्हें working करता है. इसके आलावा यह गणितीय और logical निर्णय को भी लेता है. इसलिए CPU को कंप्यूटर का nerve कहा जाता है.
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    2. RAM

    RAM कंप्यूटर का एसा हिस्सा होता है जहा पर उसके द्वारा वर्तमान में execute किये जा रहे डाटा को संगृहीत किया जाता है. यह किसी भी software को लोड होने में उसे आवश्यक memory प्रदान करता है. RAM डाटा को memory में read और write दोनों का काम करती है. RAM का पूरा नाम Random Access Memory होता है. RAM दो प्रकार की होती है : - SRAM, DRAM.

    अगर आप कंप्यूटर की पूरी जानकारी लेना चाहते है तो आपको कंप्यूटर मेमोरी क्या होता है जरुर जानना चाहिए.
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    3. ROM

    यह भी मेमोरी का ही एक प्रकार होता है. लेकिन यह RAM से अलग होती है. क्योंकि इस पर किसी भी प्रकार का डाटा write नहीं किया जा सकता है बल्कि सिर्फ डाटा को read किया जा सकता है. यह non-volatile (स्थायी) प्रकार की मेमोरी होती है.

    4. Hard Disk Drive

    यह एक स्टोरेज device होता है. जिसका उपयोग कंप्यूटर में Windows install करने और user की पर्सनल फाइल्स को स्टोर करने के लिए किया जाता है. HDD विभिन्न Size में मिलती है - 80 GB, 160, 320 GB, 500GB, 1TB......

    5. SMPS

    SMPS इसका पूरा नाम Switched Mode Power Supply होता है. यह कंप्यूटर में electricity supply को कण्ट्रोल करता है. यह कंप्यूटर में आने वाली धारा AC को DC में परिवर्तित करता है उसके बाद में electricity को computer के सभी parts को supply करता है.
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    6. Motherboard

    यह एक circuit बोर्ड होता है. जहा पर कंप्यूटर के सभी parts connected होते है. RAM, ROM, CPU इससे interconnected होते है. बल्कि HDD, DVD Writer केबल के द्वारा connected होते है. USB Port, VGA Port, Power plug, Parallel port, Serial port, Sound port यह सब motherboard के ही part है.

    Software और hardware क्या होता है?

    <----Software---->

    Software, Instruction का set होता है. जो user के द्वारा दिया जा रहे work को मशीन के समझने लायक बनाता है और फिर उस पर प्रोसेस करके user को फिर से user के समझने लायक result देने में मदद करता है.
    Example:- Microsoft Office Word, Excel, Adobe, Antivirus etc.

    <----Hardware---->

     Hardware यानि की वो सभी parts जिन्हें हम छु कर देख सकते है और जो कंप्यूटर को कार्यशील बनाने में मदद करते है. मैंने ऊपर आपको hardware parts (keyboard, Mouse, Motherboard etc) के बारे में बताया है. यह सभी hardware parts होते है.

    आशा करता हु दोस्तों इस आर्टिकल:- कंप्यूटर की पूरी जानकारी को पढने के बाद आपको कंप्यूटर की basic जानकारी मिल गयी होगी. यह बाते जानने के बाद अब आपको कंप्यूटर कैसे चलाते है like:- On, Off कैसे करते है  और कंप्यूटर कैसे सीखे जरुर जानना चाहिए.

    हेल्लो फ्रेंड्स, क्या आप 12 वीं पास कर चुके है और अब किसी Computer कोर्स को करना चाह रहे है. तो DCA computer course आपके लिए सबसे अच्छा साबित हो सकता है. क्योंकि इस कोर्स में आपको कंप्यूटर fundamental से जुडी सारे जानकारी और एप्लीकेशन या प्रोग्राम को चलाना सिखा दिया जाता है. इसलिए आज हम आपको DCA क्या है और DCA का Full Form से जुडी पूरी जानकारी देने वाले है.
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     DCA का Full Form और इसकी  पूरी जानकारी

    अगर आप पहली बार DCA का नाम सुन रहे है तो मैं आपको बता दूँ की 12 वीं के बाद यह स्टूडेंट का बहुत लोकप्रिय कंप्यूटर कोर्स है. और DCA का Full Form:- Diploma in Computer Application होता है. इस कोर्स को कर लेने के बाद आप किसी भी private या goverment जॉब work को करने लायक बन जाते है. यानि की इस कोर्स में उन सभी चीजो का समावेश होता है. जिससे हम एक computer Operator बन जाते है.


    लेकिन इस कोर्स को करने के पहले students के मन में काफि सारे सवाल होते है. जिनके बारे में हमने निचे एक-एक करके जवाब दिया है.

    Q.1) DCA कितने Year का कोर्स है?

    Answer:-  चूँकि यह एक कंप्यूटर डिप्लोमा कोर्स है. इसलिए इसकी अवधि 1 साल यानि की 12 महीने होती है.

    Q.2) DCA की fees कितनी होती है?

    Answer:- आपके एरिया में बहुत सारे computer center हो सकते है. और सभी center के पास अलग-अलग university का लाइसेंस हो सकता है. इसलिए सभी university के अनुसार इसकी fees अलग-अलग हो सकती है. लेकिन आप किसी भी संसथान से DCA करने के लिए 12000 से 14000 रु तक की fees मान कर चलिए.

    Q.3) DCA में क्या-क्या सिखाया जाता है?
     

    Answer:- इसकोर्स में आपको निम्नलिखित चीजे सिखाई जाएगी:-
    Q.4) Diploma in Computer Application (DCA) किस university से करना चाहिए?

    Answer:- Market में आपको बहुत सारी computer course करवाने वाली कम्पनीज मिल जाएगी. लेकिन आपको सिर्फ उसी center और university से DCA करना है जो की UGC से recognized हो. ताकि भविष्य में इस सर्टिफिकेट को उपयोग करने में कोई कठिनाई नहीं आये.

    आशा करता हु आप लोगो को DCA क्या है और  DCA का full form क्या है इसकी जानकारी मिल गयी होगी. लेकिन अगर अभी भी आपके मन में इससे जुड़ा कोई सवाल है तो निचे comment करे और हमसे पूछे.

    Tags:- Dca kya hai, DCa ka full form kya hai, DCA meaning in hindi,

    कंप्यूटर विज्ञानं में , Cache ऐसे डाटा का समूह होता है , जो पहले से ही कही संग्रहित किया जा चूका है एव उस डाटा की प्रति यह रखी गयी हो | वास्तविक डाटा को मेमोरी से एक्सेस करना अधिक महंगा होता है | दुसरे शब्दों में , Cache memory एक अस्थायी संग्रहन क्षेत्र होता है जहा पर डाटा को संग्रहित करके जल्द एक्सेस किया जा सकता है | एक बार डाटा को Cache में संग्रहित करने पर, भविष्य में जरूरत पढने पर Cache से डाटा की प्रति ले ली जाती है जिसके कारण से एक्सेस समय कम हो जाता है |
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    Cache memory की परिभाषा (Definition) क्या है? 

    Cache memory एक Random Access Memory होती है, जिसके द्वारा कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर स्थायी की तुलना में डाटा जल्द एक्सेस कर लेता है | चूँकि माइक्रोप्रोसेसर डाटा को सर्वप्रथम Cache मेमोरी में ढूंढता है और यदि डाटा मिल जाता है उसे ज्यादा समय खर्च नही करना पड़ता है |


    मेमोरी में लेवल्स का विवरण उसकी माइक्रोप्रोसेसर से निकट एवं एसेसेबिलिटी के द्वारा किया जाता है | Cache माइक्रोप्रोसेसर पर ही मौजूद चिप होती है जबकि सामान्यतः L2 एक अलग स्टेटिक रेम चिप होती है | जो मुख्य रेम होती है उसे डायनामिक रेम चिप कहा जाता है |

    RAM (DRAM) Chip

    Cache memory के साथ को भी हार्ड डिस्क के लिए cache मेमोरी कहा जाता है क्योंकि Cache में मौजूद सभी डाटा हार्डडिस्क से आता है और जब भी कंप्यूटर को चालू किया जाये और ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड किया जाये, Cache में भी एक विशेष क्षेत्र होता है जिसे डिस्क Cache कहा जाता है जहा पर अभी-अभी उपयोग में लाया गया डाटा रखा जाता है |

    Cache मेमोरी का कार्य –

    Cache Memory एक ऐसा ब्लाक होता है जहा पर डाटा को अस्थायी तोर पर संग्रहित किया जाता है जो निकट भविष्य में उपयोग में आना हो | CPU और हार्डडिस्क Cache का उपयोग निरंतर करते है, जैसा वेब ब्राउज़र एवं वेब सर्वर करते है |


    Cache डाटा का समुद्र होता है, जहा पर प्रत्येक डाटा एक प्रति के रूप में होता है एवं वास्तविक डाटा कही और संग्रहित होता है | प्रत्येक डाटा में एक टैग का इस्तेमाल होता है, जो वास्तविक डाटा से मिलान के कम आता है | जब CPU, वेब ब्राउज़र, ऑपरेटिंग सिस्टम डाटा को एक्सेस करना चाहता है तो वह सर्वप्रथम Cache में ढूंढता है | यदि वह डाटा जिसको एक्सेस करना है वह टैग मिलान करके में मिल जाता है तो उसका उपयोग कर लिया जाता है | इस स्थिति Cache-hit को कहा जाता है |

    यह भी पढ़े:-
    कंप्यूटर क्या होता है?
    कंप्यूटर कैसे सीखे
    कंप्यूटर का पासवर्ड कैसे तोड़े?


    इसके विपरीत स्थिति जहा पर डाटा जिसको एक्सेस करना है एवं वह मेमोरी में नही मिलता है उसे Cache miss कहा जाता है |

    Caches memory के प्रकार (Types of Caches) हिन्दी में.

    सर्च इंजन भी वेब pages सर्वप्रथम Cache memory में ढूढ़ते जिसे पहले से ही इंडेक्स किया गया हो | उदहारण के लिए गूगल द्वारा “Cache” लिंक का उपयोग सर्च के लिए किया जाता है |


    दूसरी तरह का store होता है. “Cache” जहा पर गणना किये गए परिणामो को संग्रहित कर दोबारा उपयोग हेतु रखा जाता है | इस तरह करने से दोबारा उपयोग में आने पर समय कम लगता है |

    डाटाबेस caching की सहायता से डाटाबेस एप्लीकेशन्स में काफी सुधार आया,उदाहण के लिए इंडेक्स , डाटा डिक्शनरी और अधिक उपयोग में आने वाले डाटा या उसके अंश की प्रोसेसिंग में|

    Virtual Memory & Physical Memory

    प्रोग्राम को स्टोर करते वक्त यह आभास होता है की उसे Contiguous एड्रेस पर रखा गया है| परन्तु वास्तव में प्रोग्राम का वह भाग जो अभी उपयोग में लाया जा रहा है उसे RAM में तथा जो अभी उपयोग में नही लाया जा रहा है उसे डिस्क में रखा जाता है |

    वर्चुअल (Virtual) मेमोरी एक ऐसी कंप्यूटर आधारित तकनीक होती है जिसके द्वारा किसी भी एप्लीकेशन प्रोग्राम को यह आभास होता दिलाया जाता है की उसे Contiguous मेमोरी में रखा गया है,जबकि उस प्रोग्राम को वास्तव भोतिकी रूप से विभाजित मेमोरी में स्थान दिया जाता है, यहाँ तक की डिस्क स्टोरेज ओवरफ्लो तक हो सकता है |


    इस बात पर ध्यान दिया जाये की वर्चुअल मेमोरी से तात्पर्य यह नही है कि डिस्क स्पेस का उपयोग कर भोतिक मेमरी के आकर को बढ़ाया जाये | मेमोरी को बढ़ाना, वर्चुअल मेमोरी तकनीक का एक साधारण आधार है, परन्तु इसे कुछ दुसरे तरीके से किया जाता है जो कि किसी भी प्रोग्राम और उससे सम्बन्धित डाटा को Overlay या Swapping विधि से बहार कर देता है जो अभी अनुपयोगी है | वर्चुअल मेमोरी की परिभाषा इस बात पर आधारित है कि किस तरह किसी प्रोग्राम को यह सोचने पर मजबूर किया जाये कि उसे स्टोर करने के लिए बड़े मेमोरी ब्लाक का उपयोग किया गया है, जो की Contiguous एड्रेस पर मौजूद है |

    सभी नवीनतम जनरल परपस कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम वर्चुअल मेमोरी का प्रयोग साधारण एप्लीकेशन के लिए करते है, जैसे वर्ड प्रोसेससेर , स्प्रेशीत , मल्टीमीडिया प्लेयर, एकाउंटिंग इत्यादि के लिए | embedded सिस्टम या अन्य स्पेशल परपस कंप्यूटर जो अत्यधिक तीव्र गति से कार्य करते है सामान्यतः वर्चुअल मेमोरी का प्रयोग नही करते है |

    Implementation विधि –

    (1) Paged Virtual Memory :- वर्चुअल मेमोरी के उपयोग में, वर्चुअल एड्रेस द्वारा एप्लीकेशन प्रोग्राम को pages में विभाजित किया जाता है | पेज, वर्चुअल मेमोरी एड्रेस का एक Contigous block होता है | सामान्यतः पेज का साइज़ 4Kb होता है और ऐसे सिस्टम जिसकी वर्चुअल एड्रेस की क्षमता ज्यादा होती है| या रियल मेमोरी की क्षमता ज्यादा होती है (e.g. RAM) का साइज़ भी बड़ा होता है |


    (2) Page Tables :- लगभग सभी जगह टेबल का उपयोग वर्चुअल एड्रेस को Physical एड्रेस में बदलने के लिए किया जाता है (जिसे “real address” भी कहा जाता है ) और इसका उपयोग हार्डवेयर द्वारा निर्देशों को प्रोसेस करने के लिये किया जाता है | पेज टेबल में प्रत्येक निर्देश , यह निर्देशित करते ही की उस पेज का शुरूआती वर्चुअल एड्रेस क्या है –या तो वास्तविक मेमोरी एड्रेस जहा पर पेज वास्तव मे स्टोर किया गया है और या इस बात को निर्देशित करता है की पेज डिस्क में अभी कहा रखा है |

    किसी भी सिस्टम में या तो सिर्फ एक पेज टेबल रहती है या प्रत्येक एप्लीकेशन की अलग पेज टेबल हो सकती है |

    (3) पेजिंग (Paging) :- पेजिंग वेह तकनीक होती है जिसके द्वारा ऐसे pages को वर्चुअल मेमोरी से डिस्क में लाया जाता है जो अभी उपयोग में नही है तथा फिर से उसे वास्तविक मेमोरी में स्टोर कर दिया जाता है ताकि आवश्यकता होने पर बुलाया जा सके |

    (4) डायनामिक एड्रेस translation :-
    जब CPU वर्चुअल एड्रेस पर मौजूद किसी निर्देश को बुलाता है या, किसी निर्देश को execute करता है या किसी डाटा को वर्चुअल एड्रेस पर स्टोर करता है ,तब वर्चुअल एड्रेस को भोतिक एड्रेस में बदल दिया जाता है| यह सब कार्य हार्डवेयर द्वारा किया जाता है जिसे कई बार मेमोरू मैनेजमेंट यूनिट भी कहा जाता है | यदि पेज टेबल यह करता है की वास्तविक मेमोरी में वह वर्चुअल मेमोरी पेज अभी मौजूद नही है तब हार्डवेयर द्वारा पेज फाल्ट घोषित किया जाता है |


    (5) सेगमेंटेड वर्चुअल मेमोरी :- कुछ सिस्टम , जैसे Burroughs, वर्चुअल मेमोरी के लिए पेजिंग का उपयोग नही करते है| ऐसे सिस्टम सेगमेंटेशन का उपयोग करते है, जिसके द्वारा किसी भी एप्लीकेशन का वर्चुअल एड्रेस को अनिश्चित लम्बाई के सेगमेंट में बाँट दिया जाता है | इस वर्चुअल एड्रेस में सेगमेंट नंबर और सेगमेंट के अंदर का आफसेट होता है |

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